MAYAR BHASHA राजस्थानी

"रंगीलो म्हारो राजस्थान, रूड़ी म्हारी राजस्थानी"

राजस्थान री रूड़ी रंगीली धोरां वाली धरा अर मरूधरा री आ मीठी मीठी मायड़भासा राजस्थानी
मीठा मरूधरा रा मानवी अर मीठो वां रौ ब्यौहार।

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भक्ति
भगवान रै प्रति भगत रै मन में भगती रौ परगास हुवे जद भगत रा भाव भगति री कवितावां में फूट पड़े है। राजस्थान में मोकळा ही भक्त कवि हुया है जिणां आपरै मन रा भाव परगत करिया है। इण स्तम्भ में एड़ी भक्ति री रचनावां नै गूथणै रो परियास करियो है। »

ज्ञान
ज्ञान व्यक्ति रै भौतिक, सामाजिक अर आध्यात्मिक क्रिया कळाप री उपज है, उणरी अनुभूति रौ सार है। पण ज्ञान री परिभाषा शब्दां में नी बांधीजै। सुधी जनों री रचनावां में उणरौ परगास देखीजे। इण स्तम्भ में एड़ी भक्ति री रचनावां नै गूथणै रो परियास करियो है। »

कर्म
कर्म रौ खेतर घणौ मोटो है। कर्म सूं ही संसार वर्तीजै। इण स्तम्भ में एड़ी रचनावां गूंथणे रो परियास करियो है जिकी विविध रूप सूं कर्म रौ परगास करै अर संसार नै कर्म में प्रवृत करै। »


शेरगढ से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाएं

राष्‍ट्रीय मासिक ‘शेरगढ. एक्सप्रेस’ जन-जन तक राष्‍ट्रीय अन्‍तर्राष्‍ट्रीय घटनाओं के साथ राज्‍य एवं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्‍य हलचल एवं गतिविधियों के साथ एक सम्‍पूर्ण पत्रिका के रूप में हर आयु वर्ग के पाठकों की पहली पसंद बनती जा रही है।

ढोलामारू Dholamaru

ढोलौ नरवर सेरियां,

धणं पूंगळ गळियांह।

सपनौ तौ आयौ अर परौ गियौ, पण मारवण री आंख्यां में पाछी नींद नीं आई। आंख्यां खोलै तौ बारै अंधारौ-अंधारौ लागै अर मींचै तौ अंतस में घोर अंधारौ। उठै, बैठै अर पाछी सोवै, पण जीवनै जक नीं। गांव रै बारै ताल में कुरजां कुरळायी। घर में सूती कुरजां रा बच्चा री-सी लांबी गाबड़ वाळी मारवण रौ हिवड़ौ ही वां कुरजां रै लारै कुरळायौ। सपना में दीख्योड़ौ ढोलौ अणसैंधौ व्हेतां ही मारूणी नै लाग्यौ जाणै भव-भव रौ सैंधौ वींरौ ढोलौ है। »

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महेन्द्रा मूमल की प्रेमकथा

चांद गयो घर आपणै,

उजासड़ो कवांह।

मगन व्हियोड़ो हमीर घड़ी-घड़ी रौ दूवा री इण कड़ी ने बोल रियौ। कड़ी बोलती वेळा मस्ती सूं उणरी आंखिया घुळती जाय री। आंखियां रै आगे रात नै देखियोड़ौ उजाळौ और ई ऊजळो व्हे जावै। मन री कळी खुल-खुल जाय री।हमीर जाड़ेची सोढी नै परणवा नै उमरकोट आयोड़ौ। परणिया जिण रै दूजी रात नै सुख सू लोक लुगाई सूता हा। रात नै घोड़ा नै घास नीरवा नै हमीर उठियो। उण रा घौड़ा नै वौ रात नै आपरै नजीक बांधतौ, आप रा हाथ सूं घास दाणौ देतौ उण ओवरा रै बारै बांध राखियौ।»

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यशोधरा

श्री श्रवण सिंह राजावत द्वारा रचित यह खण्डकाव्य बुद्ध और यशोधरा के चिंतन को नवीन रूपों में प्रस्तुत करता है। 

नील गगन में उड़ते पंछी जिन्हें देख तुम हरसाते

उड़ती तितली पुष्प के ऊपर मन ही मन मुस्काते

समीर सुहानी उड़ते दुकूल देख बहुत तुम लरजाते

परभृत कंठ से मधुर स्वर सुन आनंदमग्न हो जाते

कितना करते प्रेम जगत दे पल भीतर कैसे बिसरा

कौन समझ पायेगा मुझको कह रही है यशोधरा।।»

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रामचरित पदावली

श्री श्रवण सिंह राजावत द्वारा रचित भगवान राम के जीवन पर आधारित पद जिसमें प्राचीन रामकाव्‍य परम्‍परा के साथ-साथ आधुनिक बोध का समन्‍वय भी देखने को मिलता है।  

अब जागो रघुनाथ बना अरुण शिखा धुनि आय रही

राजमहल पलना पर पोढ़े रजनी आय सुलाय रही

नैन खोल देखो नारायण सुन्दर सुबह सुहाय रही।।1।।

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